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रमजान मुबारक

जब मस्जिदों से नमाज़ पढ़ के भाई मुसलमान आया है । सफेद चादर ओढ़ के मेरा हिंदुस्तान आया है । शाम को फिर महक उठेंगे बज़ार हमारे ! हमारे देश में फिर दौर-ऐ-रमजान आया है ।                 ...

इंसान

मुर्दो के शहर में जान तो ढूंढ लो । दुसरो के तलवे चाटने वाले ख़ुद की पहचान तो दुंद लो । ढूंढ़ रहे हो फरिश्ते तुम इस जहा में , खुदा तो मिल ही जायेगा पहले इंसान तो ढूंढ़ लो ।            ...

घर

माना पंछी का आशियाना पतवार ओर खर होता है । मगर अपना घर तो सबके लिए घर होता है ।                     - दिव्यांश पाठक

मोहब्बत शायरी

इश्क़ रब की सियासत है इंसानो की नही चलती । यहाँ बेवफा सिकन्दर है दीवानो की नही चलती ।                  - दि व्यांश पाठक

माँ शायरी

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दिल  से दिल को जोड़ने वाला कोई तार तो होता है । वरना जब बच्चा रोता है , तो मााँ का दिल क्यों रोता है ।                             - दिव्यांश पाठक

माँ शायरी

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आज तक कभी वो मुझसे कुछ फरमान नही करती । वो एक माँ ही है जो कभी अहसान नही करती।                              - दिव्यांश पाठक

माँ शायरी

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